8 Home Remedies : Jo Aapki Bhukh Badha Degi

Aajkal bazar ke fast food aur aniyamit khanpaan se ghar ke khane ka samay bilkul bikhar jata hai. Is vajah se samay par Bhukh na lagne ki samsya bahot aam hoti jaa rahi hai. 

Ese me kuchh Home Remedies yaani gharelu upchar bhi hai jis par amal karke ham Hunger Disorder (Bhukh na lagne ki samsya) ka samadhan kar sakte hai. Esi hi kuchh Home Remedies is article me di gai hai. Aap is upay ko ye video dekhkar bhi jaan sakte hai.



1). Kaala Namak (Himalaya Salt)
Agar aapko gas ki problem hai to kaala Namak behtar upchar hai. Kala namak chatne se gas ki samsya dur hoti hai aur bhukh bhi lagti hai. Iske alawa isse pet bhi saaf raheta hai. 

2). Harad ka churn, Saunth, Gur aur Sendha namak
Aap harad ka churn Saunth aur gur ke sath athva Sendha namak ke sath le sakte hai. Isse bhi bhukh lagti hai.

3). Sendha namak, Triflaa, Hing aur Ajwain 
Tisra upaay ye hai ki Sendha namak, Triflaa Hing aur Ajwain barabar matra me lekar churn bana len. Is churn ke barabar gur milakar chhoti chhoti goliyan bana len aur roj ek ya do goli ka sevan karen. Samsya dur hogi. 

4). Seb - Apple
Ye to har kisi ke lie faydemand upay hai. Aap roj ek seb khaen isse bhukh bhi lagti hai aur khun (Blood) bhi saaf rakhta hai. 

5). Harad aur Neem ki Nimboliyan 
Harad ko neem ki kadvi nimboliyon ke sath lene se bhukh bhi lagti hai aur charm rog (Skin problem) se bhi chhutkara milta hai. 

6). Saunth ka churn aur Ghee 
Ye upay bhi kargar hai ki Saunth ke churna aur Ghee ko mila len aur ise chaten. Bad me halka garam pani pine se bhukh lagti hai. 

7). Adarak aur Sendha namak 
Har roj khana khane se kuchh samay pahele adarak (Ginger) ke tukde me jara sa Sendha namak chhidakkar chatne se bhi bhukh lagti hai. Iska swad bhi testy hota hai. 

8). Gehun, Ajwain aur Sendha namak
Gehun ke chokar me Sendha namak aur Ajwain milakar roti banaen aur khaen. Ye roti khane me bhi testy hoti hai aur isse bhukh bhi lagti hai. 

Machchhar Bhagane ke 3 Saste aur Gharelu Upay

machchhar bhagane ke gharelu upay - hindi fun box

Jaisa ki aap sab jante hai ki filhaal august ka mahina chal rha hai yaani rain ka mausam. Aur is mausam me chhat par, khule me rakhe hue kabadi ke saman me tatha purane tyres jaisi bekaar pdi chijon me  barsat ka pani jama hota hai aur isi pani me thode hi dino me machchhar jama hone lagte hai.  

Kul milakar is tarah ka jama hua pani machchharo ka ghar ban jata hai. Iska ek ilaaj ye hai ki is tarah ki chijo me pani ko jama hi na hone diya jae. 

Lekin agar ye samasya ham apne ghar se nikaal denge par padosh ke gharo me agar ese halaat hai to iska ilaaj kya karen ? 

Padosh ke gharo me machchhar ka aashraysthan banega to ykinn machchhar hamare ghar me bhi aa hi jaenge. 

Ab machchharo ko ghar me aane se rokne ke lie market me kai tarah ke sadhan, agarbatti, aur liquid mil jaenge par uske lie badi price bhi chukani padegi. Iske alawa kuchh ese gharelu upay bhi hai jiske upyog se ham asani se machchharo ko ghar se dur rakh sakte hai. Ese 3 upay yahan diye gae hai. 

1). Koyla aur Santre ka Chhilka
Aap koyle me santre ke sukhe chhilke ko jalakar dhuan kar sakte hai. Is dhuen ko kamre me achchhe se faila dene se machchhar ghar se bahar nikal jaenge. 

2). Kapur
Kapur machchhar bhagane ka sabse asan tarika hai. Kapur ki 1 yaa 2 chhoti tikiyaa jalane se 15 - 20 minutte me hi machchhar ghar se bahar chale jaenge. 

3). Lavender Room Freshner 
Machchharo ko lavender ki khushbu bilkul pasand nahi hoti. Aap lavender ke room freshner ka istemal kar ke bhi machchharo ko ghar se bahar rakh sakte hai. 

Bajra Masala Roti Recipe - (5 Steps) | कभी खाई है ऐसी बाजरा मसाला रोटी ?

Bajra Masala Roti Recipe


{रेसिपी}, Bajra Masala Roti Recipe : जब ये पोस्ट लिखी जा रही है तब बारिश का मौसम पूरा होने को है और ठंड का मौसम शुरू होने को. मौसम का सीधा असर हमारे शरीर और सेहत पर पड़ता है.

शरीर को अगर मौसम अनुसार खुराक न मिले तो बीमार होना लाजमी है. शर्दियो के दिनों में शरीर को अंदर से गर्मी मिलनी चाहिए जिससे बाहरी ठंड शरीर को नुकसान न पहुंचा सके.

शरीर को अंदरूनी गर्मी देने के लिए कई Food है. इनमे से एक है Bajra. बाजरा बहोत से लोगो का प्रिय Lunch है. खास कर उन लोगो का जिनका काम काज मशक्कत और महेनत वाला होता है.

ऐसी ही एक बाजरे की Recipe प्रस्तुत लेख में स्टेप बाय स्टेप सिखाई गई है. तो चलिए जानते है Bajra Masala Roti Recipe. 


Bajra Masala Roti Recipe - hindi fun box - Recipe in hindi

Ingredients for Bajra Masala Roti Recipe



  • 250 ग्राम - बाजरे का बेसन 
  • 100 ग्राम - गेहूँ का बेसन
  • 250 ग्राम - खट्टा दही
  • 1 पुड़िया - मेथी की भाजी
  • 2 - हरी मिर्च
  • 1 छोटा चम्मच - हल्दी
  • 1/2 छोटा चम्मच - अदरक लहसुन की पेस्ट
  • 1 छोटा चम्मच - मिर्च पावडर
  • 1 चुटकी भर - हींग
  • 3 - कटे हुए प्याज
  • स्वादानुसार - तेल, नमक, गरम मसाला


Bajra Masala Roti Recipe Step By Step


1). सबसे पहले मेथी की भाजी को धो कर जितना हो सके बारीक़ काट लें. फिर बाजरे और गेहूँ के बेसन को एक मध्यम बर्तन में मिलाएं.

2). अब दोनों बेसन के साथ में तेल, नमक, मिर्च पावडर, गरम मसाला, अदरक लहसुन की पेस्ट और हींग डाल दें. और बिना पानी मिलाएं बेसन हाथो से कड़क बांधे.

3). दोनों बेसन / सभी मसाले मिलाने और इस मिश्रण को कड़क बांधने के बाद अब बेसन के बर्तन में थोड़ा पानी डालें और एक घंटे तक रहने दें.

4). एक घंटे के बाद जब बेसन का कड़क मिश्रण रोटी बेलने लायक नर्म हो जाए तब उसमें से छोटे छोटे टुकड़े ले कर रोटी की तरह लेकिन मोटी परत में बेलें.

5). अब बेल कर तैयार हो चुकी बाजरे की रोटियों को एक पैन में तेल डालकर ऊपर नीचे दोनों तरफ बराबर तलें. लीजिए तैयार है गरमा गरम  Bajra Masala Roti Recipe इसे कटे हुए प्याज के साथ सर्व करें. Bajra Masala Roti Recipe और प्याज के कॉम्बिनेशन से लाजवाब स्वाद मिलता है.



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दो बाज - प्रेरक कहानी, जो आपको बहुमूल्य सीख देती है


किसी मुल्क में एक एक बहोत ही न्यायप्रिय राजा रहा करते थे. वह न्यायप्रिय होने के साथ साथ अपने राज्य के हर छोटे से छोटे और गरीब से गरीब व्यक्तियों के साथ भला बर्ताव करता था. जिस वजह से अपनी प्रजा में वो बेहद लोकप्रिय थे. 

लोगो का उनके प्रति प्रेम इस कदर गहरा था कि हर कोई आए दिन राजा को अपनी हैसियत के मुताबिक तोहफे दिया करता. वहीं राजा भी उनको अपने शाही खजाने से तोहफे देकर बदला दिया करते. 

ऐसे ही एक दिन राजा को तोहफे में दो परिंदे (पक्षी) मिले. वो परिंदे असल में ऊंचे किस्म के बाज थे. राजा ने अपनी पूरी जिंदगी में ऐसे बाज पहले कभी नही देखे थे. इतना नायाब तोहफा पाकर वो खुश हुए और अपने खास वजीर को कहा कि दोनों बाज पक्षी के लिए खान-पान का इंतजाम करें फिर उन्हें शाही बागीचे में उड़ने के लिए छोड़ दिया जाए. वजीर ने ठीक वैसा ही किया जैसा उन्हें कहा गया. 

अगले दिन राजा ने दरबार का कामकाज निपटाकर वजीर से उन दो बाज पक्षी का हालचाल पूछा. वजीर ने बताया कि दोनों बाज में से एक बाज ऊंची उड़ान भर रहा है मगर दूसरा बाज एक पेड़ की टहनी पर बैठा हुआ है और उड़ नही रहा. 

राजा हैरान हुए की बाज तो दोनों एक ही किस्म के है तो दूसरा बाज उड़ान भरने की बजाय पेड़ पर क्यों बैठा रहता है ? 

इसी तरह घंटे दिन और दिन महीनों में ढल गए लेकिन वह बाज न उड़ सका. आखिर राजा ने राज्य में वजीर को कहा कि पूरे राज्य में घूमकर कहीं से भी किसी ऐसे व्यक्ति को ले आओ जो बरसों जंगलो में गुजार चुका हो और जिसे परिंदो की चाल-चलगत का अनुभव हो. 

तलाश के बाद वजीर ने एक बूढ़े आदमी को राजा के सामने पेश किया और बताया कि ये पक्षियों के हावभाव जानने में माहिर है. राजा ने उस आदमी को दोनों बाज पक्षियों के बारे में बताया और कहा कि एक बाज पेड़ की टहनी पर ही दिन-रात गुजार देता है जब कि दूसरा बाज ऊंची उड़ान भरता है. 

आदमी ने राजा से एक दिन की महोलत मांगी. एक दिन के बाद जब राजा अपने शाही बागीचे में टहलने निकले तो देखा कि दोनों बाज ऊंची उड़ान भर रहे थे. राजा हैरान हुए की इस आदमी ने ऐसा क्या कर दिखाया कि एक ही दिन में बाज पेड़ की टहनी छोड़कर ऊंचा उड़ रहा है !!

राजा ने उस बूढ़े आदमी को दरबार मे बुलाया और इसकी वजह पूछी. बूढ़े आदमी ने जवाब दिया कि मैंने और तो कुछ खास नही किया बस पेड़ की जिस टहनी पर बाज बैठा करता था मैंने वो टहनी काट दी. 

ये कहानी हमारी जिंदगी के लिए बहोत बड़ा सबक है. हमे जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए मौके तो बहोत मिलते है लेकिन हम अपनी सुख-सुविधाओं और बेमतलब परंपराओं से बाहर कदम ही नही रखना चाहते. नई परीक्षा और नए तजुर्बे जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए जरूरी है. 

अंधो की संख्या - अकबर बीरबल के मजेदार किस्से

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अकबर और बीरबल के किस्से केवल मजेदार ही नही होते बल्कि उसे पढ़कर हमारी तर्कबुद्धि में भी बढ़ोतरी होती है. ऐसा ही एक किस्सा है जिसका शीर्षक है "अंधो की संख्या". क्या है ये किस्सा और किस तरह बीरबल ने अपने  बुद्धिचातुर्य से अकबर का मन मोह लिया आइए जानते है..

एक बार अकबर दरबार में बैठे हुए थे कि अचानक उनके मन में एक सवाल उठ खड़ा हूआ. दरबार भरा हुआ था और अकबर ने सीधे बीरबल से संबोधन करते हुए कहा, " बताओ, बीरबल हमारे पूरे नगर में किसकी संख्या ज्यादा होगी ? अंधो की जो देख नही सकते ? या उनकी जो अंधे नही है और देख सकते है ?"

इस तरह अचानक भरे दरबार में बीरबल पर आ पड़े इस सवाल से वह हक्के-बक्के रह गए. लेकिन पलभर में स्वस्थ होकर उन्होंने जवाब दिया, "महाराज, इस वक्त फौरन तो आपके सवाल का जवाब दे पाना कठिन है.  हांलाकि इस बारे में मैं निश्चिन्त हूँ कि पूरे नगर में देख सकने वाले व्यक्तियों की संख्या से अधिक अंधे व्यक्तियों की संख्या होगी. "

अकबर : " यह तुम कैसे कह सकते हो ? तुम्हे यह साबित करके दिखाना होगा "

बीरबल : " बिल्कुल, अगर आप मुजे एक दिन की महोलत दें तो मैं इस बात को साबित भी कर दूंगा और इसकी सही सही संख्या भी बता पाऊंगा "

अकबर : " ठीक है, तुम्हे एक दिन का वक्त दिया जाता है "
उस दिन दरबार छूटने के बाद अगले दिन सुबह बीरबल दरबार नही गए बल्कि एक बगैर बनी हुई चारपाई लेकर नगर के मुख्य बाजार में बैठ गए और रस्सी से चारपाई की बुनाई करने लगे. उस वक्त बीरबल के साथ दो आदमी भी थे जी कागज और कलम लेकर बैठे थे.

बीरबल को अकबर के दरबार के बजाय यूं बीच बाजार चारपाई बुनते हुए देख नगरजन आश्चर्यचकित और हैरान रह गए. तथा बीरबल से इस तरह चारपाई की बुनाई करने का कारण पूछने लगे.

बीरबल से जो व्यक्ति भी बुनाई करने की वजह पूछता बीरबल उसका नाम बगल में बैठे आदमी को लिखने को कह देते. ऐसे होते होते आधा दिन गुजर गया और अनेक व्यक्ति बीरबल से मिले, कारण पूछा और बीरबल ने उसका नाम लिखवा लिया.

वहीं दूसरी और दरबार में बीरबल की गैरहाजरी से अकबर बेचैन हो उठे. दरबारियों से पूछताछ करने पर मालूम हुआ कि बीरबल तो नगर के मुख्य बाजार में चारपाई की बुनाई कर रहे है. बीरबल को मन ही मन गुस्सा आया कि मैं यहां दरबार में कल पूछे सवाल के जवाब की प्रतीक्षा कर रहा हूँ और वो बीच बाजार में बुनाई करने के मामूली काम मे व्यस्त है.

अकबर अपने अंगरक्षकों के साथ दौड़े-दौड़े नगर के बाजार पहुंचे. देखा कि बीरबल चारपाई बुनने में इतने व्यस्त हैं कि नजर उठाकर उनकी तरफ देख भी नही रहे. अकबर बीरबल के करीब पहुंचे और पूछा, " बीरबल यह बीच बाजार तूम क्या कर रहे हो, वहां दरबार मे मैं तुम्हारी राह देखते देखते थक गया.. "

बीरबल ने देखा कि अकबर खुद दरबार छोड़कर उनके पास आए है और सवाल कर रहे है. बीरबल ने बगल में बैठे आदमी से अकबर का नाम भी कागज में लिख लेने को कहा.

अकबर ने जब बीरबल से नाम लिखने की वजह पूछी तो बीरबल ने कहा, " आपका नाम उन व्यक्तियों की सूची में लिखा गया है जो आंखे होने के बावजूद अंधे है, क्योंकि आपने देखा कि मैं चारपाई बुन रहा हूँ फिर भी आपने मुझसे सवाल पूछा कि मैं क्या कर रहा हूँ.."

इतना कहकर बिरबल ने बगल में बैठे दोनो आदमियों से कागज लेकर शाह अकबर को दिए फिर बोले, "महाराज, ये लीजिए ये दोनों कागज में उन लोगों की सूची है जो देख सकते है और उनकी भी जो देख नही सकते.

और इसमें मेरे कहे अनुसार देख सकने वाले व्यक्तियों की संख्या से अधिक अंधे व्यक्तियों की संख्या है. ये वह व्यक्ति है जो आंखे होने के बावजूद और ये देखने के बावजूद की मैं चारपाई बुन रहा हूँ मुझसे पूछा कि मैं क्या कर रहा हूँ.

बीरबल की बात सुनकर अकबर को अपने सवाल का जवाब मिल गया. और इसी तरह बीरबल ने एक बार फिर अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय दिया.